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नियमों की धज्जियां, चार्ज का खेल और शासन की मेहरबानी! योगी राज में भी जारी ‘प्रोत्साहन बनाम अनियमितता’ का खतरनाक खेल

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प्रदीप कुमार उपाध्याय

आवास एवं शहरी नियोजन विभाग में पदोन्नति नहीं, ‘इनाम’ बांटने का आरोप

लखनऊ | विशेष रिपोर्ट

आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के अधीन नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग में पूर्ववर्ती सरकार की तर्ज पर नियमविरुद्ध पदोन्नति और चार्ज बांटने का खेल योगी राज में भी जारी रहने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सवाल यह नहीं कि गलती हुई है, सवाल यह है कि गलती जानते हुए भी शासन आंखें क्यों मूंदे बैठा है?

अर्हता नहीं, फिर भी मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक का चार्ज

सूत्रों के अनुसार, विभागीय सेवा नियमावली-1987 के विपरीत पदोन्नति पाए अधिकारी श्री कृष्ण मोहन को प्रदेश के मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक का कार्यभार (चार्ज) सौंप दिया गया। यही नहीं, “प्रोत्साहन” में कोई कमी न रह जाए, इसके लिए उन्हें चीफ कोऑर्डिनेटर प्लानर (NCR) मेरठ मंडल के मंडलीय प्लानर का अतिरिक्त चार्ज भी दिया गया।

अब वाराणसी–प्रयागराज पर नजर!

मामला यहीं नहीं रुका। जानकारी के मुताबिक, दो और मंडलों का अतिरिक्त चार्ज भी ऐसे अधिकारियों को दिया गया है जो की अहर्ताये पूर्ण  नहीं करते है 

वाराणसी मंडल (माननीय प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र) का चार्ज भी एक अधिकारी को अतिरिक्त चार्ज के रूप में दिया गया, जिसके पास पहले  से ही लखनऊ मंडल का भारी-भरकम कार्य है 

प्रयागराज मंडल में सहयुक्त नियोजक ( मंडलीय प्लानर ) का चार्ज एक सहायक वास्तुविद नियोजक ( द्वितीय श्रेणी अधिकारी ) जिनका अभी प्रोबेब्शन / परिवीक्षा अवधि चल रही है। 

यानी एक ही अधिकारी के पास मुख्य पद + 3 अतिरिक्त चार्ज, जबकि विभाग में उनसे वरिष्ठ और योग्य अधिकारी मौजूद हैं।

 

 IDSMT योजना का खेल: विभाग नहीं, फिर भी वेतन चालू

श्री कृष्ण मोहन की मूल नियुक्ति IDSMT योजना के तहत सहायक वास्तुविद् नियोजक पद पर हुई थी।

चौंकाने वाली बात यह है कि, IDSMT योजना अब नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग द्वारा संचालित ही नहीं है

वर्तमान में यह नगर विकास विभाग के अधीन है फिर भी वर्षों से वेतन और भत्तों का आहरण जारी है, यह सीधा-सीधा राजकोषीय धन की हानि का मामला बनता है।

 मेरठ मंडल और मास्टर प्लान-2031 में गंभीर आरोप

श्री कृष्ण मोहन पर आरोप है कि:

  • मेरठ मंडल में 10 से अधिक भू-उपयोग परिवर्तन बिना मंडलीय प्लानर की आख्या के शासन को भेजे गए
  • कई मानचित्र स्वीकृतियां नियमविरुद्ध जारी की गईं
  • यह सब कार्य रात 2 बजे तक कार्यालय में बैठकर किए गए

 

इतना ही नहीं, मेरठ मास्टर प्लान-2031 में भी गंभीर अनियमितताओं की जानकारी शासन को होने के बावजूद, कार्रवाई के बजाय प्रभारी मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक का चार्ज देकर सम्मानित किया गया।

नियमों की खुली अवहेलना, फिर भी ‘शासन के चहेते’

प्रभारी मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक द्वारा:

  • पीएटी (PAT) का चार्ज ऐसे अधिकारी को दिया गया जो केवल अपर संख्या अधिकारी हैं
  • जबकि नियमानुसार यह पद द्वितीय श्रेणी अधिकारी (सहायक नगर नियोजक) को ही दिया जा सकता है
  • फिर भी न कोई आपत्ति, न कोई कार्रवाई।

 वरिष्ठ अधिकारियों की अनदेखी, जूनियर को सत्ता

विभाग के भीतर भारी असंतोष है। वरिष्ठ, योग्य और अनुभवी अधिकारी मानसिक पीड़ा में हैं, जबकि उनसे जूनियर अधिकारी को सत्ता, चार्ज और प्रभाव सौंप दिया गया है। सवाल उठता है—

  •  योगी राज में ऐसी चूक कैसे संभव है?
  •  शासन किस दबाव या कारण से नियमों की अनदेखी कर रहा है?

 

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