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₹1 में नक्शा पास का झूठ बेनकाब, लखनऊ विकास प्राधिकरण पर फर्जी प्रचार और अवैध वसूली का गंभीर आरोप

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प्रेस विज्ञप्ति बनाम जमीनी हकीकत

लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा पूर्व में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह प्रचारित किया गया कि 100 वर्ग मीटर तक के भूखण्ड पर मात्र ₹1 में आवासीय मानचित्र स्वीकृत किए जाएंगे। यह दावा अब पूरी तरह झूठा और भ्रामक साबित हो रहा है। अखबारों में प्रकाशित इस खबर ने आम जनता को भ्रमित किया, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है।

72 वर्ग मीटर के नक्शे पर ₹1 लाख की मांग

अंसल टाउनशिप में स्थित भूखण्ड संख्या जी/6/0126एफ, क्षेत्रफल 72 वर्ग मीटर, के लिए आवासीय मानचित्र स्वीकृति हेतु आवेदन किया गया। पोर्टल शुल्क के नाम पर जारी मांग पत्र में लगभग ₹1,00,000 की वसूली दिखाई गई, जिससे ₹1 वाली कथित योजना की सच्चाई उजागर हो गई।

पहले से जमा शुल्क फिर भी दोबारा ठोके गए

                                                                                 स्टेटमेंट/मांग पत्र

 

अंसल गोल्फ सिटी में मलबा भंडारण शुल्क, जल शुल्क और सुंदरीकरण शुल्क पहले ही टाउनशिप स्वीकृति के समय अंसल इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी द्वारा जमा किए जा चुके थे। इसके बावजूद आवेदक अजय अग्रवाल, पुत्र जगदीश प्रसाद, मोबाइल 9919115186, के भूखण्ड जी/6/0126एफ के प्रस्तुत मानचित्र पर वही शुल्क दोबारा अवैध रूप से अध्यारोपित कर दिए गए।

कानून की धज्जियां, अवैध सुख-सुविधा शुल्क

मामला यहीं नहीं रुका। उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 15, उपधारा (2ख) का खुला उल्लंघन करते हुए ₹500 प्रति वर्ग मीटर की दर से सुख-सुविधा शुल्क थोप दिया गया और ₹32,451.58 (लगभग ₹32,500) का अलग से मांग पत्र जारी कर दिया गया।

अधिनियम क्या कहता है, प्राधिकरण क्या कर रहा है

अधिनियम में स्पष्ट व्यवस्था है कि सुख-सुविधा शुल्क केवल विशेष सुविधा के लिए ही लिया जा सकता है, जैसे—

  • मेट्रो मार्ग के दोनों ओर 500 मीटर की अधिसूचित टीओडी क्षेत्र,

  • या आरआरटीएस परियोजना से जुड़े 500 मीटर के टीओडी क्षेत्र।

इन सीमाओं के बाहर कहीं भी यह शुल्क लेना कानूनन अवैध है, फिर भी वसूली जारी है।

अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

आरोप है कि प्राधिकरण के मुख्य नगर नियोजक और संबंधित अधिकारी अवैध शुल्कों की वसूली कर जनता को परेशान कर रहे हैं। नियम-कानून को ताक पर रखकर यह सिलसिला चलाया जा रहा है।

जनता त्रस्त, शासन की साख पर आंच

इस अवैध वसूली से आम नागरिक त्रस्त है। लोग कह रहे हैं कि योगीराज के नाम पर जनता की जेब पर डाका डाला जा रहा है। अब सवाल यह है कि इस खुले झूठ और लूट पर कब कार्रवाई होगी और जिम्मेदारों पर कानूनी शिकंजा कब कसेगा।

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