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प्रदीप कुमार उपाध्याय
ज़ीरो टॉलरेंस नीति की धज्जियां — विद्युत यांत्रिक अवर अभियंताओं पर गंभीर आरोप
लखनऊ। मुख्यमंत्री की ज़ीरो टॉलरेंस नीति के दावों के बीच लखनऊ विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन जोन 1 से 3 तक तैनात विद्युत यांत्रिक अवर अभियंताओं को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। आरोप है कि जहां ऊपर से सख्त निर्देश दिए जाते हैं, वहीं ज़मीनी स्तर पर अवैध निर्माणों की “फसलें” लगातार लहलहा रही हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या प्रवर्तन विभाग कार्रवाई कर रहा है या सब कुछ कथित मिलीभगत से चल रहा है?
जोन-1: अवैध निर्माण का ‘सबसे हरा-भरा मैदान’?
सूत्रों के अनुसार जोन-1 में तैनात विद्युत यांत्रिक अवर अभियंता राहुल विश्वकर्मा, शिवानंद शुक्ला और सिविल के अवर अभियंता विपिन राय के कार्यक्षेत्र में अवैध निर्माणों की सबसे ज्यादा चर्चा है। स्थानीय स्तर पर कहा जा रहा है कि यहां निर्माण रोकने के बजाय तेजी से बढ़ रहे हैं। यह सीधे तौर पर ज़ीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल खड़ा करता है।
जोन-2: पोस्टिंग के बाद बढ़ी रफ्तार?
बताया जा रहा है कि विद्युत यांत्रिक अवर अभियंता शिवानंद शुक्ला जोन-1 के साथ-साथ जोन-2 का भी प्रवर्तन कार्य देख रहे हैं। आरोप है कि उनकी तैनाती के बाद अवैध निर्माणों की गतिविधियां तेज हुई हैं।
जोन-3: ‘जुगाड़ पोस्टिंग’ की चर्चाएं
जोन-3 में तैनात विद्युत यांत्रिक अवर अभियंता राम चौहान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि उन्होंने कथित जुगाड़ के दम पर दोबारा इसी जोन में पोस्टिंग कराई। सूत्रों का दावा है कि पिछली तैनाती के दौरान भी अवैध निर्माण बढ़े थे।
‘एक-दो करोड़ कमाए बिना शादी नहीं’ — सिस्टम पर सवाल
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि एक विद्युत यांत्रिक अवर अभियंता जो कि ज़ोन 3 में तैनात है कथित तौर पर कहता है —
“जब तक एक-दो करोड़ नहीं कमा लेंगे, तब तक शादी नहीं करेंगे।”
अगर यह सच है तो यह सिर्फ बयान नहीं, बल्कि व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।
इतना ही नहीं, यह भी चर्चा है कि संबंधित अभियंता जेब में ड्राई फ्रूट्स रखकर घूमते हैं, जिसे लोग कथित आलीशान जीवनशैली के प्रतीक के तौर पर देख रहे हैं।
नोटिस-सीलिंग की सच्चाई सामने क्यों नहीं आती?
मांग उठ रही है कि प्रवर्तन जोन 1 से 3 तक नोटिस और सीलिंग कार्रवाई का थाना-वार स्वतंत्र सत्यापन और स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। अगर सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो पारदर्शी जांच से परहेज क्यों?
गाजियाबाद केस: सुपरवाइजर पकड़ा गया, अभियंता फरार
इसी बीच गाजियाबाद विकास प्राधिकरण का पुराना मामला भी चर्चा में है। आरोप है कि विद्युत यांत्रिक अवर अभियंता अजीत कुमार और सुपरवाइजर राजकुमार ने मुरादनगर क्षेत्र में छत डलवाने के नाम पर 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।
विजिलेंस कार्रवाई में 2 लाख रुपये लेते हुए सुपरवाइजर राजकुमार रंगे हाथों पकड़ा गया, जबकि अवर अभियंता अजीत कुमार मौके से फरार हो गए थे। यह घटना पिछले वर्ष जून माह की बताई जाती है।
इस घटना के उपरांत तत्कालीन उपाध्यक्ष, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने विद्युत यांत्रिक के सभी अवर अभियंताओं को प्रवर्तन कार्य से हटा दिया था।
सबसे बड़ा सवाल
क्या प्रवर्तन विभाग अवैध निर्माण रोकने के लिए है या संरक्षण देने के लिए?
क्या ज़ीरो टॉलरेंस नीति सिर्फ भाषणों तक सीमित है?
और अगर आरोप गलत हैं तो खुली जांच से सच सामने क्यों नहीं लाया जाता?
जब तक पारदर्शी जांच नहीं होती, ये सवाल उठते रहेंगे।
क्रमशः प्रवर्तन जोन 4 से 7 का हाल अगली खबर में…..
Perfect Media News Agency
