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एलडीए के “भ्रष्टाचार सम्राट” संजय शुक्ला: तीन में बजाई बीन, चार में लगाए चार चाँद, सात में मचाई तबाही — अब जोन-5 में राज’ कायम!

भ्रष्टाचार का बादशाह या सहायक अभियंता ? सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शासन में तैनात एक प्रमुख सचिव की शह से एलडीए में चल रहा है संजय शुक्ला का साम्राज्य — नियम, नोटिस और आदेश सब जेब में!
लखनऊ।


लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में भ्रष्टाचार का चेहरा बन चुके सहायक अभियंता संजय शुक्ला एक बार फिर सुर्खियों में हैं — और इस बार भी वजह वही पुरानी है: रसूख और रियल एस्टेट माफ़िया से सांठगांठ! कहते हैं, जहाँ संजय शुक्ला तैनात, वहाँ अवैध निर्माणों की बरसात!

एलडीए का हर जोन इनके लिए सिर्फ़ एक “कमाई का ठिकाना” बन चुका है — जहाँ नियम बिकते हैं, नोटिस गायब होते हैं और बिल्डरों का राज चलता है।

“ऊपर तक पकड़” और “नीचे तक खेल”

नगर पालिका सेवा से प्रमोट होकर आए इस दबंग सहायक अभियंता की पकड़ इतनी मजबूत है कि, एलडीए के बड़े अधिकारी तक इनसे सवाल पूछने से डरते हैं। हर बार गंभीर शिकायतों के बावजूद, इनकी तैनाती वहीं होती है जहाँ मलाई मोटी हो —

सहायक अभियंता संजय शुक्ला ने प्रवर्तन जोन तीन ( 3 ), जोन चार ( 4 ), जोन सात ( 7 ) के बाद अब अपने प्रिय जोन पाँच ( 5 ) जुगाड से तैनाती हासिल करने के बाद खुलेआम अवैध निर्माण कार्य करने वालों को संरक्षण देना शुरू कर दिया।

सूत्रों का दावा है कि शुक्ला अपने खास सिपाहसलारों के साथ मिलकर, बिल्डरों से सीधे सौदे करते हैं — सेटिंग और डीलिंग के बाद अवैध निर्माण मंज़ूर और सब कुछ “फिक्स”! एलडीए के आदेश और मंडलायुक्त के नोटिस तक इनके लिए बस काग़ज़ का टुकड़ा हैं — क्योंकि सब “ऊपर तक” सेट है

पूर्व मंडलायुक्त रोशन जैकब द्वारा इनके ख़िलाफ़ एक प्रकरण में जाँच के आदेश दिये गये थे, परन्तु इन्होंने अपने रसूख के चलते जाँच को ठंडे बस्ते में डलवा दिया।

जोन-दर-जोन खेल का खुलासा–

जोन-4 में शिकायतों की बाढ़ — हटाए गए।
जोन-3 में पहुँचे — शिकायतें और बढ़ीं।
जोन-7 भेजे गए — पसंद नहीं आया।उसके बाद एक बड़े अधिकारी की तत्काल कृपा प्राप्त करके अपना तबादला जोन-5में करवा लिया।


और अब जोन-5 में फिर वापसी! सूत्र बताते हैं कि जब यह अवर अभियंता थे तब भी जोन-5 में लम्बे समय तक तैनात रह चुके हैं। उस समय एक नेशनल चैनल पर इनकी लेन-देन की मोबाइल रेकॉर्डिंग वायरल हुई थी। उसके बाद इन्हें जोन-5 से पूर्व उपाध्यक्ष द्वारा हटाया गया था।खास बात यह भी है कि इसी जोन में इनका निवास भी है, जिससे डीलिंग में किसी भी तरह की परेशानी ना ही अवैध निर्माणकर्ताओं को होती है,और ना ही इन्हें सारा काम आसानी से सम्पन्न हो जाता है।
क्या एलडीए में तबादले अब मेहनत या ईमानदारी से नहीं, बल्कि ऊँची पहुँच और सेटिंग से तय होते हैं?
यह सवाल अब जनता के साथ-साथ एलडीए के अवर अभियंता और सहायक अभियंताओं के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। नाम ना छापने की शर्त पर एक अवर अभियंता ने बताया कि संजय शुक्ला ने सुबह मुझसे कहा कि जोन सात में कुछ है नहीं, किस जोन में तबादला करवा लूँ, इसके बाद उन्होंने बोला कि जोन-5 ठीक रहेगा बताओ, इस पर इस अवर अभियंता ने कहा जैसा आप उचित समझें, उसी शाम इनका तबादला जोन-5 में कर दिया गया।इतना तगड़ा इनका सिस्टम है, जब चाहा जहाँ चाहा अपना तत्काल तबादला करवा लिया।

संजय शुक्ला की एंट्री के बाद जोन-5 “अवैध निर्माणों की फैक्ट्री” बना।

बिल्डरों की चांदी और नियमों की बर्बादी शुरू हो चुकी है। कई इलाक़ों में खुलेआम बहुमंज़िला इमारतें उठ रही हैं, सील बिल्डिंगों में तेजी से निर्माण कार्य चालू हो गया है। जोन-5 में तैनात अवर अभियंता इनके पावरफुल कनेक्शन और बेधड़क अवैध निर्माण करवाने की शैली से प्रभावित होकर इनके कन्धे से कंधा मिलाकर अवैध निर्माण करवाने में तेजी से जुटे हुए हैं। जिस कारण जोन पाँच अवैध निर्माणों की मंडी बन चुका है।

किसी बिल्डर को डर नहीं, किसी बिल्डर को रोक नहीं — क्योंकि “शुक्ला जी सब संभाल लेंगे।”
स्थानीय लोगों का कहना है कि इनके कार्यकाल में बिना रिश्वत या सिफ़ारिश के कोई ईंट तक नहीं रख सकता।
विभाग आँख मूंदे बैठा है, मानो एलडीए कोई सरकारी संस्था नहीं, बल्कि संजय शुक्ला एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड बन चुकी हो।

“भ्रष्टाचार का सिस्टमाइज्ड नेटवर्क”
एलडीए में अब भ्रष्टाचार कोई अपवाद नहीं, बल्कि “सिस्टम” बन चुका है। एक ओर विभाग पूरे लखनऊ में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई का दिखावा करता है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं अभियंताओं की मिलीभगत से
रातों-रात टॉवर उठ खड़े होते हैं। जिनके पास “संजय शुक्ला का कनेक्शन” है, उनके लिए कानून महज़ मज़ाक है।
बाक़ी जनता के लिए नोटिस, सीलिंग और डर का तंत्र। कब तक जनता की ज़मीन और भरोसे को ये इंजीनियर रौंदते रहेंगे?

अब सवाल यह उठता है कि कब तक उपाध्यक्ष और मंडलायुक्त इस भ्रष्टाचार पर चुप्पी साधे रहेंगे?

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