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प्रवर्तन ज़ोन-7 में अवैध निर्माण का तांडव!

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अभियंताओं की तिकड़ी पर मिलीभगत के गंभीर आरोप

लखनऊ। प्रवर्तन ज़ोन-7 के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में स्वीकृत मानचित्रों के विपरीत अवैध निर्माण बेकाबू होता जा रहा है। विभागीय अवर अभियंताओं और सहायक अभियंता पर खुली मिलीभगत और संरक्षण देने के आरोप तेज़ हो गए हैं। नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए निर्माण इतने व्यवस्थित तरीके से हो रहे हैं कि पूरा सिस्टम संदिग्ध नज़र आने लगा है।

इलाज के बहाने ट्रांसफ़र, फिर मनचाही पोस्टिंग — संदेह गहराया

सूत्रों के अनुसार, अवर अभियंता प्रमोद पांडे गैर-जनपद से इलाज के नाम पर ट्रांसफ़र होकर लखनऊ आए। इसके बाद जुगाड़ के दम पर उन्होंने प्रवर्तन ज़ोन-7 में अपनी पसंद की तैनाती हासिल कर ली। पांडे की तैनाती के बाद से ज़ोन-7 में अवैध निर्माणों की रफ़्तार अचानक बढ़ना सवाल खड़े करता है।

अवैध निर्माण को “खुली छूट” देने वाली तिकड़ी?

अवर अभियंता प्रमोद पांडे, अवर अभियंता विवेक पटेल, और सहायक अभियंता अनूप श्रीवास्तव की तिकड़ी पर आरोप है कि उन्होंने पूरे क्षेत्र में बिल्डरों को बिना रोक-टोक निर्माण की सुविधा दे रखी है।

 सूत्र बताते हैं कि इन तीनों की सांठगांठ से कई स्थानों पर:

  • बिना पार्किंग,
  • बिना स्वीकृत मानचित्र,
  • और बिना  सुरक्षा मानकों के निर्माण तेजी से खड़े हो रहे हैं।

आगामीर ड्यूरी पुलिस चौकी के सामने लखनऊ विकास प्राधिकरण को चुनौती देता हुआ अवैध निर्माण।

पुलिस चौकी के सामने ही नियमों की धज्जियाँ — पाँचवीं छत तक निर्माण!

सबसे चौंकाने वाला मामला आगामीर ड्यूटी पुलिस चौकी के ठीक सामने सामने आया है। यहाँ एक बिल्डर द्वारा सकरी सड़क पर बिना पार्किंग व्यवस्था किए हुए बेसमेंट सहित पाँचवीं छत तक निर्माण किया जा रहा है।

 चौंकाने वाली बात यह है कि इतना स्पष्ट उल्लंघन होने के बावजूद प्रवर्तन ज़ोन-7 के अभियंता न तो रोकथाम कर रहे हैं और न ही कार्रवाई, जिससे मिलीभगत के आरोप और तीखे हो रहे हैं।

पूरे ज़ोन में निर्माण माफिया सक्रिय — विभाग मौन

प्रवर्तन ज़ोन-7 में अवैध निर्माण जिस तरह बढ़ रहे हैं, उससे यह साफ दिखाई देता है कि नियम पुस्तिका का कोई अस्तित्व ही नहीं रह गया है। अभियंता अपने स्तर पर कोई रोकथाम करेंगे, ऐसा दिखाई नहीं देता।

 अवैध निर्माणों को जिस तरीके से आगे बढ़ने दिया जा रहा है, वह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है।

 

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