| Getting your Trinity Audio player ready... |
भीड़ प्रबंधन, डूबने की घटनाओं, शीत लहर व अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने पर हुआ मंथन
प्रयागराज, 22 दिसंबर। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) द्वारा माघ मेला की तैयारियों के दृष्टिगत प्रयागराज में एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी एवं टेबल-टॉप एक्सरसाइज का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सहभागिता की।

कुंभ और माघ मेला विश्व के सबसे बड़े जनसमूह आयोजनों में
संगोष्ठी की शुरुआत यूपीएसडीएमए के वाइस चेयरमैन योगेन्द्र डिमरी (लेफ्टिनेंट जनरल, सेवानिवृत्त) के संबोधन से हुई।
अपने मुख्य वक्तव्य में डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि कुंभ और माघ मेला विश्व के सबसे बड़े Public Gathering Events में शामिल हैं, जहां कुछ विशेष तिथियों पर एक ही समय और स्थान पर जनसमूह की संख्या अत्यंत विशाल हो जाती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों में चुनौती केवल भीड़ की संख्या नहीं होती, बल्कि उसकी निरंतर बदलती और गतिशील प्रकृति भी होती है। नदी से जुड़े जोखिम, डूबने की घटनाएं, शीत लहर का प्रभाव, अग्नि दुर्घटनाओं की संभावना और यातायात व पार्किंग जैसी समस्याएं एक साथ उत्पन्न होती हैं, जिनसे निपटने के लिए समग्र और बहुआयामी रणनीति आवश्यक है।
पूर्वानुमान आधारित और समन्वित रणनीति पर जोर
पुलिस महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि अब व्यवस्थापन का दृष्टिकोण केवल घटना के बाद प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं रह सकता। इसके बजाय पूर्वानुमान आधारित, योजनाबद्ध और प्रशिक्षित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित करना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न विभाग अपनी-अपनी तैयारियां करते हैं, लेकिन आपात स्थिति में इन सभी को एकीकृत, समन्वित और समयबद्ध प्रतिक्रिया में बदलना अत्यंत आवश्यक है।
प्रवेश-निकास मार्ग और माइक्रो-क्राउड मॉनिटरिंग अहम
डीजीपी ने माघ मेला की सफलता के लिए प्रवेश-निकास मार्गों की वैज्ञानिक योजना, स्नान घाटों पर भीड़ के संतुलित प्रबंधन और माइक्रो-क्राउड की निरंतर निगरानी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि एसडीआरएफ (SDRF) अब केवल बैक-अप बल नहीं, बल्कि भीड़ सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की ऑपरेशनल व्यवस्था का अभिन्न अंग बन चुका है, जिसने पूर्व आयोजनों में उच्च स्तर की दक्षता का प्रदर्शन किया है।
किसी भी स्तर पर आत्मसंतोष नहीं
अग्नि दुर्घटना, शीत लहर और डूबने से जुड़े जोखिमों पर चर्चा करते हुए डीजीपी ने विभागों के बीच सतत समन्वय, प्रभावी संचार और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को अनिवार्य बताया। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि पूर्व अनुभव होने के बावजूद किसी भी स्तर पर शिथिलता या आत्मसंतोष नहीं होना चाहिए, क्योंकि हर दिन नई चुनौतियां सामने आती हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों ने भी रखे विचार
संगोष्ठी के दौरान पी.एस. शेखावत, संजीव गुप्ता, मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, यूपीएसडीएमए, एनडीआरएफ और विभिन्न जनपदों के डीडीएमए अधिकारियों द्वारा भी अपने विचार रखे गए।
अंत में डीजीपी ने विश्वास जताया कि इस प्रकार की संगोष्ठियां और टेबल-टॉप एक्सरसाइज प्रशासन व पुलिस की तैयारियों को और अधिक सुदृढ़ करेंगी तथा आगामी माघ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और विश्वास सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
Perfect Media News Agency
