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लखनऊ, प्रदीप कुमार उपाध्याय
राजधानी लखनऊ में नगर नियोजन और विकास की जिम्मेदारी निभाने वाला लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) अब भ्रष्टाचार, दलाली और कूट रचना का प्रतीक बनता जा रहा है। गोमती नगर विस्तार योजना के सेक्टर-5 में सामने आया यह मामला इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि किस प्रकार पूर्व स्वीकृत ले-आउट से छेड़छाड़ कर,आम जनता से भूखण्ड नीलामी के नाम पर करोड़ों रुपये की वसूली की गई।
45 मीटर चौड़ी सड़क समाप्त कर गुप्त रूप से बसाई गई कॉलोनी
प्राप्त शिकायत के अनुसार, गोमती नगर विस्तार योजना के पूर्व स्वीकृत ले-आउट में सेक्टर-5 के भूखण्ड संख्या 5/01 से 5/31 तक के सामने उत्तर दिशा में स्थित 45 मीटर चौड़े मार्ग को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया। इसी मार्गाधिकार की भूमि पर गुप्त रूप से नया ले-आउट तैयार कर, भूखण्ड संख्या 5/965 से 5/1002 तक 75 वर्ग मीटर के दर्जनों नए भूखण्डों का निर्माण कर दिया गया।
इन भूखण्डों को नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से विक्रय कर दिया गया, और चौंकाने वाली बात यह है कि भूखण्ड आवंटन पत्र तथा मांग पत्र भी जारी कर दिए गए, जबकि यह सम्पूर्ण प्रक्रिया स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी और कूट रचना की श्रेणी में आती है।
न स्वीकृति, न रेरा पंजीकरण — फिर भी खुलेआम बिक्री सबसे गंभीर और चिंताजनक तथ्य यह हैं कि—
नवसृजित भूखण्डों के निर्माण हेतु किसी भी सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति प्राप्त नहीं की गई
रेरा प्राधिकरण से न तो अनुमोदन लिया गया और न ही पंजीकरण कराया गया
पूर्व स्वीकृत ले-आउट के अंतर्गत जिन भवन स्वामियों को 45 मीटर चौड़े मार्ग से आवागमन का अधिकार प्राप्त था, उनसे बिना अनापत्ति प्रमाणपत्र लिए सड़क को समाप्त कर दिया गया
जनता को 45 मीटर चौड़े मार्ग के स्थान पर केवल 12 मीटर चौड़ी संकरी गली थमा दी गई
यह समस्त कार्यवाही लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की आपसी मिलीभगत से की गई।
नीलामी के नाम पर तीन से चार गुना अधिक वसूली
आरोप है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा 75 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले छोटे भूखण्डों को नीलामी का प्रचार कर, गरीब एवं जरूरतमंद नागरिकों से वर्तमान बाजार मूल्य से तीन से चार गुना अधिक धनराशि वसूल की गई।
जनता को यह विश्वास दिलाया गया कि सम्पूर्ण प्रक्रिया नियमों के अनुरूप है, जबकि वास्तविकता में पूरा तंत्र फर्जीवाड़े पर आधारित था।
रेरा को लेकर भी जनता को गुमराह करने का आरोप
जब भूखण्डों के रेरा पंजीकरण को लेकर सवाल उठे, तो लखनऊ विकास प्राधिकरण के भ्रष्ट अधिकारियों, मुख्य नगर नियोजक, अपर सचिव, सचिव, नीलामी प्रकोष्ठ के प्रभारी अधिकारी तथा उपाध्यक्ष द्वारा मौखिक रूप से यह कहा गया कि
“रेरा पंजीकरण की प्रक्रिया चल रही है।” लेकिन जब सीधे रेरा प्राधिकरण से जानकारी प्राप्त की गई, तो सच्चाई सामने आई—
45 मीटर चौड़े मार्ग की भूमि पर बनाए गए इन नवसृजित भूखण्डों का कोई भी रेरा पंजीकरण नहीं है और न ही भविष्य में इन्हें वैध किया जा सकता है।
लखनऊ विकास प्राधिकरण : विकास संस्था या भ्रष्टाचार का अड्डा?
यह मामला लखनऊ विकास प्राधिकरण की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। जिस संस्था को जनहित में नगर नियोजन और सुव्यवस्थित विकास सुनिश्चित करना था, वही संस्था अब दलालों और भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलकर जनता को ठगने का केंद्र बनती जा रही है।
मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच और धन वापसी की मांग
पीड़ित नागरिकों की ओर से माननीय मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि— पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल एवं कठोर कार्रवाई की जाए,गरीब जनता से वसूली गई सम्पूर्ण धनराशि ब्याज सहित वापस कराई जाए
अब सबसे बड़ा सवाल यह है—
क्या 45 मीटर चौड़ी सड़क को निगल जाने वालों पर कार्रवाई होगी, या फिर फाइलें भी सड़क की तरह ही गायब कर दी जाएँगी?
Perfect Media News Agency
