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भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार: प्रवर्तन ज़ोन–3 के जोनल अधिकारी विपिन शिवहरे हटाए गए, ईमानदार अफसर देवांश त्रिवेदी की एंट्री से ज़ोन–3 में हड़कंप

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प्रदीप कुमार उपाध्याय

मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर एलडीए उपाध्यक्ष का सख्त एक्शन

लखनऊ विकास प्राधिकरण में आखिरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति को ज़मीन पर उतारते हुए एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने प्रवर्तन ज़ोन–3 के जोनल अधिकारी विपिन शिवहरे को प्रवर्तन कार्य से मुक्त कर दिया है
उनकी जगह ईमानदार, तेजतर्रार और कर्मठ अधिकारी देवांश त्रिवेदी को जोन–3 की कमान सौंपी गई है। वहीं दूसरी ओर जोन पाँच से जोनल अतुल कृष्ण को हटाकर रविनंदन सिंह को तैनात किया गया है।

इस कार्रवाई के बाद ज़ोन–3 में तैनात अभियंताओं के बीच हड़कंप मच गया है

झूठी रिपोर्टों का खुलासा, उपाध्यक्ष की जांच में फंसा पूरा खेल

पिछले महीने प्रवर्तन ज़ोन–3 में अवैध निर्माण को लेकर उपाध्यक्ष के पास गंभीर शिकायत पहुंची थी।
जब उपाध्यक्ष ने जोनल अधिकारी से रिपोर्ट मांगी तो:

  • सहायक अभियंता और अवर अभियंता राहुल विश्वकर्मा की मिलीभगत से झूठी रिपोर्ट पेश की गई।
  • रिपोर्ट में दावा किया गया कि निर्माण स्वीकृत मानचित्र के अनुसार है।

लेकिन जब उपाध्यक्ष ने स्वयं जांच करवाई, तो हकीकत सामने आ गई —
निर्माण पूरी तरह से मानचित्र के विपरीत पाया गया।

गदाईखेड़ा चौराहे का मामला भी निकला फर्जी रिपोर्ट का नमूना

उपाध्यक्ष की ओर से गदाईखेड़ा चौराहे के पास हो रहे अवैध निर्माण की भी रिपोर्ट मांगी गई थी।
इस मामले में भी:

  • रिपोर्ट में बताया गया कि बिल्डिंग 2024 से सील है
  • लेकिन यह नहीं बताया गया कि
    • वाद कब दायर हुआ?
    • एक साल बाद भी ध्वस्तीकरण आदेश क्यों नहीं पारित हुआ?

यानी, सीधे तौर पर अधिकारियों द्वारा सच्चाई छुपाई गई।

गलत रिपोर्ट ने जोनल अधिकारी को भी कटघरे में खड़ा किया

एक प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक की रिपोर्ट के अनुसार,
सहायक अभियंता और अवर अभियंता राहुल विश्वकर्मा की झूठी रिपोर्ट ने जोनल अधिकारी को भी कटघरे में खड़ा कर दिया।

इसके बाद उपाध्यक्ष ने:

  • जोनल अधिकारी
  • सहायक अभियंता
  • अवर अभियंता राहुल विश्वकर्मा तीनों से एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा और

प्रवर्तन का कार्य इनसे हटाने तथा कठोर कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजने की बात कही।

शुक्रवार की सख्त कार्रवाई: शिवहरे बाहर, देवांश  त्रिवेदी अंदर

शुक्रवार को आखिरकार बड़ा फैसला लिया गया

  • विपिन शिवहरे को प्रवर्तन कार्य से हटा दिया गया
  • और देवांश त्रिवेदी को नया जोनल अधिकारी नियुक्त किया गया

देवांश त्रिवेदी की पहचान एलडीए में:

  • तेज़ तर्रार अफसर
  • भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख
  • कार्रवाई से पीछे न हटने वाली छवि के रूप में है।

अब सवाल सीधा है — क्या ज़ोन–3 में बचे भ्रष्ट अभियंताओं पर भी गिरेगी गाज?

ज़ोन–3 में लंबे समय से अवैध निर्माण, झूठी रिपोर्ट और मिलीभगत की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
अब जब ईमानदार अधिकारी देवांश त्रिवेदी की एंट्री हो चुकी है, तो सवाल उठ रहे हैं:

  • क्या अब अवैध निर्माण कराने वाले अभियंता बच पाएंगे?
  • क्या राहुल विश्वकर्मा और अन्य दोषियों पर सीधी कार्रवाई होगी?
  • क्या जोन–3 वाकई भ्रष्टाचार से मुक्त हो पाएगा?

 

“नोटिस–सील–शमन का खेल”: प्रवर्तन विभाग का अंदरूनी ब्लैक सिस्टम बेनक़ाब

नाम न छापने की शर्त पर एक बिल्डर ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि प्रवर्तन विभाग में तैनात अभियंताओं द्वारा अवैध निर्माण करवाने में सहयोग के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है।
बिल्डर के अनुसार, उनसे कहा जाता है कि “अगर किसी ने IGRS पर शिकायत कर दी, किसी पत्रकार ने खबर छाप दी या किसी भी तरह की शिकायत हो गई, तो हमारे स्तर से सिर्फ नोटिस काट दिया जाएगा, आप निर्माण कार्य निर्बाध जारी रखिए।”

इसके बाद दिखावे के तौर पर सीलिंग की कार्रवाई भी कर दी जाती है, लेकिन अंदरखाने यह भरोसा दिया जाता है कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार का वास्तविक हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
अगर इसके बावजूद शिकायत जारी रहती है तो आर्किटेक्ट से शमन मानचित्र बनवाकर कुछ हज़ार रुपये फीस के रूप में प्राधिकरण में जमा करवा दीजिए — और आपकी सील बिल्डिंग फिर से खोल दी जाएगी।

इस पूरे बयान से यह साफ होता है कि नोटिस, सीलिंग और शमन की पूरी प्रक्रिया केवल कागज़ी दिखावा बनकर रह गई है, जबकि ज़मीनी स्तर पर अवैध निर्माणों को संरक्षण देने का संगठित सिस्टम सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

 

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